नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के फाइनेंशियल आंकड़ों ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। NTA ने 2018-19 से 2023-24 के बीच एप्लीकेशन फीस से कुल ₹3,512.98 करोड़ कमाए। लेकिन इसमें से सिर्फ ₹3,064.77 करोड़ — यानी 87.2% — एग्जाम कराने पर खर्च किए। बाकी बचे ₹448.21 करोड़ सरप्लस के रूप में सामने आए हैं। ये आंकड़े NTA के अपने डेटा पर आधारित हैं और इन्होंने एजेंसी की फीस नीति पर सवाल उठा दिए हैं।
NTA का ₹448.21 करोड़ सरप्लस: क्या है पूरा मामला?
NTA हर साल लाखों स्टूडेंट्स से एप्लीकेशन फीस लेती है — चाहे वो JEE Main हो, NEET UG हो, या UGC NET जैसे एग्जाम। 2018-19 से 2023-24 तक के आंकड़े बताते हैं कि NTA ने कुल ₹3,512.98 करोड़ फीस से कमाए। लेकिन एग्जाम कराने का खर्च सिर्फ ₹3,064.77 करोड़ रहा। इसका मतलब है कि NTA के पास ₹448.21 करोड़ का सरप्लस बचा है। ये पैसा कहां गया और क्यों NTA ने फीस कम नहीं की — ये अब सबसे बड़ा सवाल है।
क्यों है ये सरप्लस विवाद में?
जब कोई सरकारी एजेंसी स्टूडेंट्स से फीस लेती है, तो उम्मीद यही होती है कि वो पैसा एग्जाम कराने में ही खर्च होगा। लेकिन NTA के मामले में 12.8% पैसा बच गया। ये सरप्लस बताता है कि NTA ने स्टूडेंट्स से जरूरत से ज्यादा फीस वसूली। अब सवाल ये है कि क्या NTA को फीस घटानी चाहिए थी? या फिर ये सरप्लस किसी और काम में लगाया गया?
हमारी बात: NTA के सरप्लस पर सीधी राय
हमारी नज़र में ये मामला बहुत सीधा है। NTA एक सरकारी एजेंसी है जो स्टूडेंट्स की फीस पर चलती है। जब एजेंसी के पास ₹448 करोड़ से ज्यादा का सरप्लस है, तो इसका मतलब है कि स्टूडेंट्स से ज्यादा पैसा लिया गया। NTA को चाहिए था कि वो फीस घटाए या फिर ये साफ करे कि ये सरप्लस कहां जाएगा। पारदर्शिता की कमी से स्टूडेंट्स का भरोसा टूटता है। सरकार को इस मामले में NTA से जवाब मांगना चाहिए और फीस नीति पर दोबारा विचार करना चाहिए।
Sources & References
- NTA Financial Data — Original Story